भरूच, गुजरात – गुजरात के पूर्व विधायक छोटूभाई वसावा ने न्यू इंडिया मिनरल्स इंडस्ट्रीज को पडाल गांव, झगड़िया तालुका में 48.6815 हेक्टेयर (पुराने सर्वे नंबर 552, 554, 553, 559, 581 (पी); नए सर्वे नंबर 407, 408, 330, 399, 379) में दी गई सिलिका सैंड खनन लीज में बड़ी अनियमितताओं का पर्दाफाश किया है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों द्वारा लीज रद्द करने के लिए कई शिकायतें की गई हैं। आरोप है कि यह लीज और इसके लिए प्राप्त सभी आवश्यक अनुमतियां गलत जानकारी के आधार पर प्राप्त की गई हैं।
मुख्य आरोप:
गलत आंकड़े: SEAC मीटिंग में भूमि के प्रकार के बारे में गलत जानकारी दी गई।
गौचर जमीन का दुरुपयोग: यह क्षेत्र "सरकारी गौचर" के रूप में नामित है, जो "गुजरात गौचर नीति" और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत सुरक्षित है।
पर्यावरणीय मंजूरी का उल्लंघन: गलत जानकारी के आधार पर प्राप्त पर्यावरण मंजूरी (EC) को अवैध बनाता है, फिर भी खनन जारी है।
आदिवासी अधिकार: यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति क्षेत्र है, जो विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत सुरक्षित है।
बार-बार शिकायतों के बावजूद, अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की है, जिससे वसावा ने इस मामले को प्रधानमंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री तक ले जाने का फैसला किया है।
यदि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और अन्य अधिकारी उचित जांच करते हैं, तो सुरत घोटाले से भी बड़ा हजारों करोड़ रुपये का भूमि और खनन घोटाला उजागर हो सकता है।
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