डॉ. धवल पटेल, आईएएस: खनन के अंधेरे रहस्यों की पड़ताल
प्रस्तावना
डॉ. धवल पटेल भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी हैं, जो वर्तमान में गुजरात के भूविज्ञान और खनन विभाग के कमिश्नर के रूप में कार्यरत हैं। आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की उनकी पहल को व्यापक सराहना मिली थी। लेकिन जबसे उन्होंने खनिज खनन कमिश्नर का पद संभाला है, तब से उनके कार्य करने के तरीके पर कई सवाल उठने लगे हैं।
क्या वे किसी अदृश्य दबाव में काम कर रहे हैं? क्या गुजरात के खनन उद्योग में कुछ ऐसा हो रहा है जिसे वे उजागर नहीं कर पा रहे हैं? इस डॉक्यूमेंट्री में हम उन रहस्यों और सच्चाइयों की गहराई से पड़ताल करने का प्रयास करेंगे।
भाग 1: डॉ. धवल पटेल – एक ईमानदार अधिकारी या मजबूर प्रशासक?
डॉ. धवल पटेल ने अपने करियर में कई प्रशंसनीय कार्य किए हैं। विशेष रूप से, जब उन्होंने जून 2023 में आदिवासी क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे, तब सरकार को अपनी नीतियों की समीक्षा करने पर मजबूर होना पड़ा था।
सूरत जिले के कलेक्टर के रूप में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भी सराहनीय कार्य किया था। ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित करने से लेकर प्रवासिय कम्दारो की मदद तक, उन्होंने हर संभव प्रयास किए, जिसके लिए उन्हें व्यापक सराहना मिली। और ऐसे ही कई जगह पर उन्होंने बड़े सराहनीय काम किये है।
लेकिन जब बात गुजरात के खनन विभाग की आती है, तो स्थिति बिल्कुल भिन्न नजर आती है:
- अवैध खनन का खेल: गुजरात के कई आदिवासी बहुल इलाकों में अवैध खनन तेजी से बढ़ रहा है। खनिजों के उत्खनन में नियमों की अनदेखी हो रही है, और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
- पुरानी खदानों का रहस्य: 1970-80 के दशक में स्वीकृत खदानें आज भी सक्रिय हैं। क्या यह संभव है, या फिर यहां बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो रही है? क्या यह जादुई खदानें हैं, जहां खनिज कभी खत्म ही नहीं होते?
- VTMS प्रणाली की विफलता: अवैध खनिज परिवहन को रोकने के लिए बनाई गई VTMS (Vehicle Tracking &
Monitoring System) प्रणाली पूरी तरह से असफल साबित हो रही है। स्थानीय सोर्स के रिपोर्टों के अनुसार, ट्रैकिंग डिवाइस को बाइक पर लगाकर भ्रम फैलाया जा रहा है ताकि ट्रकों की वास्तविक मूवमेंट छुपाई जा सके।
- त्रिनेत्र ड्रोन निगरानी प्रणाली: 2018 में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी द्वारा शुरू किया गया यह कार्यक्रम अवैध खनन और रेत निष्कर्षण पर नज़र रखने के लिए लाया गया था। लेकिन इसकी मौजूदा स्थिति पर अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, मुझे अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि इसे अभी कहां रखदिया गया है।
- रॉयल्टी घोटाला: कई खदानो मेसे निर्धारित सीमा से 10-20 गुना तक अधिक खनिज निकाला जा रहा हैं, और फिर भी उन्हें सरकार से वैध रॉयल्टी पास मिल जाता है। आखिर यह कैसे संभव है?
भाग 2: क्या डॉ. धवल पटेल पर कोई दबाव है?
जब डॉ. धवल पटेल ने शिक्षा सुधार के लिए आवाज उठाई थी, तब उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय किया था। लेकिन जब खनन से जुड़ी गड़बड़ियों की बात आती है, तो प्रशासन निष्क्रिय क्यों दिखता है? क्या उच्च स्तर से उन पर दबाव डाला जा रहा है?
- खनन माफिया की पकड़: गुजरात के खनन क्षेत्र में कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों और राजनेताओं का मजबूत दबदबा है। कुछ सोर्स संकेत देते हैं कि बड़े उद्योगपति और राजनेता इस धंधे में शामिल हैं, जो प्रशासन को कार्रवाई करने से रोक रहे हैं।
- आदिवासी समुदाय पर प्रभाव: अवैध खनन से जलस्तर गिर रहा है, पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, और स्थानीय समुदायों की आजीविका खतरे में पड़ रही है। उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है, लेकिन शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
भाग 3: सरकार और खनन माफिया का गठजोड़?
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि प्रशासन को इन अवैध गतिविधियों की जानकारी है, तो वह कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? क्या सरकार और खनन माफिया के बीच कोई गठजोड़ है?
- दस्तावेजों में हेरफेर: कई बार खनन कंपनियों के दस्तावेजों में हेरफेर कर उन्हें वैध ठहराया जाता है।
- नियामक संस्थाओं की विफलता: पर्यावरणीय मंजूरी देने वाली संस्थाएं खदानों के अवैध विस्तार पर ठोस कदम नहीं उठा रही हैं।
- मीडिया की चुप्पी: मुख्यधारा की मीडिया इस मुद्दे को पर्याप्त तवज्जो नहीं दे रही। क्या इसे भी चुप कराया जा रहा है?
भाग 4: आगे क्या?
अगर डॉ. धवल पटेल वास्तव में ईमानदार हैं और उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में बदलाव की पहल की थी, तो अब उन्हें खनन क्षेत्र में भी कठोर कदम उठाने होंगे।
- पारदर्शिता बढ़ानी होगी: VTMS प्रणाली को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए और अवैध खनन की रिपोर्टों की निष्पक्ष जांच हो। खादानोका इंस्पेक्शन और मापणी हो।
- आदिवासी समुदाय की भागीदारी: स्थानीय समुदायों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए ताकि वे अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठा सकें।
- स्वतंत्र जांच एजेंसी की मांग: एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा खनन से जुड़े भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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आदिवासी क्षेत्रों में होने वाले अवैध खनन के लिए लगाए गए दंड की पूर्ण वसूली की जाए और उसे DMF (District Mineral Foundation)
में जमा किया जाए।
निष्कर्ष
डॉ. धवल पटेल ने जैसे शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाने की मांग उठाकर यह साबित किया कि वे एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी हैं। इस पहल को हम सराहनीय मानते हैं और इसके लिए उन्हें धन्यवाद भी देते हैं। लेकिन जब बात खनन विभाग की आती है, तो वे अब तक कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम क्यों रहे हैं?
क्या वे किसी दबाव में हैं? क्या वे भ्रष्टाचारियों के जाल में फंस चुके हैं? या फिर वे सही समय का इंतजार कर रहे हैं?
यह केवल एक शुरुआत है। अगर हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों को बचाना है और भ्रष्टाचार को खत्म करना है, तो जनता को भी इस लड़ाई में आगे आना होगा।
क्या डॉ. धवल पटेल इस चुनौती को स्वीकार करेंगे? क्या वे शिक्षा की तरह खनन क्षेत्र में भी बदलाव लाने का साहस दिखाएंगे? या फिर यह रहस्य हमेशा के लिए दफन हो जाएगा?
समय ही इसका उत्तर देगा।
डॉ. भाविनकुमार शांतिलाल वसावा, भरूच
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