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Tuesday, November 12, 2024

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी का पर्यटन प्रभावहीन क्यों हो रहा है? 'फील गुड मूवमेंट' के लिए आदिवासी सहभागिता क्यों जरूरी है

 


स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी: डॉ. भाविन वसावा के दृष्टिकोण से एक गहन विश्लेषण

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी भारत की एकता, अखंडता और सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रति सम्मान का प्रतीक हैयह प्रतिमा, नर्मदा नदी के किनारे गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित है और सरदार पटेल को समर्पित है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के विभिन्न रियासतों को एकीकृत कर देश को एक संगठित रूप दियाइस परियोजना का उद्देश्य भारत के लोगों में राष्ट्रीय एकता और गर्व की भावना को जागृत करना हैहालाँकि यह प्रतिमा एक ऐतिहासिक महत्व की धरोहर है, लेकिन इसकी राह में कई चुनौतियाँ और विवाद भी आए हैं


डॉ. भाविन वसावा की कहानी: एक आदिवासी की नज़र से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की गाथा

डॉ. भाविन वसावा, एक आदिवासी समुदाय से जुड़े हुए डॉक्टर और समाजसेवी हैंसरदार सरोवर परियोजना से लेकर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक के इस सफर को उन्होंने करीब से देखा हैडॉ. भाविन की ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा उस जमीन से जुड़ा रहा है, जिसे आज 'एकता नगर' कहा जाता हैकेवड़िया के वो जंगल, वो पहाड़, वो नदियां, जिन्हें उन्होंने अपने बचपन से देखा, जिन्हें वो और उनका समुदाय पीढ़ियों से संजोता रहा था, अब एक बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं


डॉ. भाविन जब भी केवड़िया के उस पहाड़ी इलाके में कदम रखते हैं, उनकी आंखों में एक दर्द छुपा होता हैउनके लिए ये सिर्फ एक जगह नहीं थी, बल्कि उनकी जड़ों का प्रतीक थीअब वहाँ कंक्रीट की बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी हो चुकी हैंहर तरफ होटल, रिसॉर्ट्स, मॉल्स और रेस्टोरेंट्स की चकाचौंध हैएक समय था जब ये धरती हरी-भरी फसलों, पक्षियों के गीतों और प्राकृतिक सुंदरता से भरी हुई थी, लेकिन अब वहाँ पर एक अजीब सी बनावट का माहौल छाया हुआ हैचारों ओर पुलिस की गश्त और सिक्योरिटी के नाम पर स्थानीय लोगों का अपनी ही जमीन पर पराया होना उन्हें चुभता है


डॉ. भाविन बताते हैं कि पहले केवड़िया में चारों ओर हरियाली, खुली हवा, और अपनेपन की महक थीबच्चे नदी में खेलते थे, किसान अपने खेतों में काम करते थे, और लोग एक-दूसरे के साथ जुड़े रहते थेलेकिन अब ऐसा लगता है जैसे इस धरती पर कंक्रीट का जंगल उग आया हो, जो उनकी ज़िंदगी से हरियाली और अपनेपन को दूर करता जा रहा है


डॉ. भाविन की नज़र से सबसे बड़ी कमी यह थी कि इस विकास की चकाचौंध में स्थानीय लोगों का अस्तित्व कहीं खो गया थाउन्होंने गोवा, दिव, और मुंबई जैसी जगहों का उदाहरण दियावहाँ के स्थानीय लोग अपने छोटे-छोटे व्यवसायों से केवल अपना गुजारा करते हैं, बल्कि पर्यटकों के साथ अपनापन भी बांटते हैंगोवा में छोटे होटल चलाने वाले या मुंबई की टपरी पर चाय बेचने वाले जब पर्यटकों से बातचीत करते हैं, तो एक रिश्ता बनता हैउनकी आत्मीयता, उनका अपनापन और वह छोटा-सा स्थानीय व्यवसाय, पर्यटकों के अनुभव में मिठास घोलता है


लेकिन केवड़िया, जो अब 'एकता नगर' बन चुका है, यहाँ डॉ. भाविन को ऐसा कोई अपनापन नज़र नहीं आताबड़े-बड़े रिसॉर्ट्स में काम करने वाले लोग बस अपनी नौकरी कर रहे हैं, लेकिन वहाँ वो स्थानीय जुड़ाव कहीं नहीं हैडॉ. भाविन का मानना है कि अगर इस क्षेत्र में स्थानीय आदिवासियों को रोजगार के अवसर मिलते, तो यह पर्यटन स्थल एक बिल्कुल अलग अनुभव का प्रतीक बन सकता थाआदिवासी अपने छोटे-छोटे व्यवसाय खोलते, अपने रीति-रिवाजों को साझा करते, पर्यटकों को अपने क्षेत्र की असली खुशबू का एहसास कराते


डॉ. भाविन कहते हैं, "स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का मकसद एकता का प्रतीक बनना था, पर आज यहाँ के स्थानीय लोग इस एकता का हिस्सा नहीं बन पाए हैंजिन पहाड़ों, नदियों, और जंगलों में हमारा बचपन बीता, जो हमारे पूर्वजों की धरोहर है, वह आज हमसे दूर होता जा रहा हैअगर इन आदिवासियों को भी इस विकास की कहानी का हिस्सा बनाया जाता, तो यह धरती फिर से जीवंत हो सकती थी/है।"


डॉ. भाविन की आवाज़ में दर्द है, पर साथ ही एक उम्मीद भी हैवह मानते हैं कि अगर इस क्षेत्र में स्थानीय आदिवासी समुदाय को रोजगार और व्यवसाय के अवसर दिए जाएं, तो यह परियोजना सच में एकता का प्रतीक बन सकती हैडॉ. भाविन का यह मानना है कि यहाँ का पर्यटन, स्थानीय लोगों की सहभागिता से, एक ऐसा अनुभव बन सकता है, जो हर किसी के दिल को छू ले


कहानी का अंत होता है लेकिन डॉ. भाविन की उम्मीदें बनी रहती हैंउनकी इच्छा है कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की यह यात्रा सच में एकता का प्रतीक बने, जहाँ पर्यटकों को स्थानीय लोगों का अपनापन मिले और आदिवासियों का सम्मान बना रहे

डॉ. भाविनकुमार शांतिलाल वसावा

भरूच

                            


परियोजना का विस्तृत विवरण

उद्देश्य: स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी का निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल के अभूतपूर्व योगदान को यादगार बनाने के लिए किया गया हैउनकी भूमिका के प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हुए, यह प्रतिमा एकीकृत और सशक्त भारत की भावना को प्रकट करती है


स्थान: यह विशाल प्रतिमा गुजरात राज्य के नर्मदा जिले में स्थित हैनर्मदा नदी के तट पर बने इस स्मारक का दृश्य अत्यंत मनोहारी है और यह पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता के साथ ऐतिहासिक गौरव का अनुभव प्रदान करता है


ऊंचाई: स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी की ऊंचाई 182 मीटर है, जो लगभग 600 फीट के बराबर हैइसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा का दर्जा प्राप्त है, जो अपनी भव्यता और शिल्पकला के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में है


सामग्री: यह प्रतिमा मुख्य रूप से कंक्रीट और स्टील से निर्मित है, जो इसे मजबूती और स्थायित्व प्रदान करता है


उद्घाटन समारोह

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी का उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया थायह दिन सरदार पटेल की जयंती के रूप में भी मनाया जाता हैउद्घाटन समारोह में भव्य आयोजन किया गया था, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और राष्ट्रगान के साथ सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की गईइस अवसर पर लोगों ने राष्ट्रीय एकता और समर्पण की भावना का अनुभव किया


परियोजना की लागत

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी की निर्माण लागत लगभग 3,000 करोड़ रुपये थीइस लागत को लेकर देशभर में कई तरह की चर्चाएं और बहसें हुईंजहां एक ओर लोगों ने इसे भारत की पहचान और एकता के प्रतीक के रूप में देखा, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इसकी लागत पर सवाल उठाए


स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी की प्रमुख सुविधाएं

यह स्थान केवल एक प्रतिमा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके आसपास कई सुविधाएं और आकर्षण हैं जो इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनाते हैं:

  • सरदार सरोवर डेम: यह बांध प्रतिमा के समीप स्थित है और इसे देखने भी दूर-दूर से लोग आते हैं
  • म्यूज़ियम: यहां एक संग्रहालय भी है जिसमें सरदार पटेल के जीवन, उनके कार्यों और उनके योगदान से जुड़ी वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैंयह संग्रहालय आगंतुकों को उनके जीवन के हर पहलू से परिचित कराता है
  • लाइट एंड साउंड शो: हर शाम एक भव्य लाइट और साउंड शो का आयोजन किया जाता है, जो केवल प्रतिमा की सुंदरता को उजागर करता है, बल्कि सरदार पटेल की जीवनगाथा को भी सजीव करता है
  • गार्डन: प्रतिमा के चारों ओर सुंदर और हरे-भरे उद्यान बनाए गए हैं जो प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कराते हैं
  • विज़िटर सेंटर: पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एक विज़िटर सेंटर भी है, जहां से वे स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी और इसके आसपास के क्षेत्र के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं


पर्यटन का केंद्र

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक बन गया हैप्रतिवर्ष लाखों पर्यटक इसे देखने आते हैं, जिससे यह पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका हैइसके निर्माण से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं और पर्यटन के कारण स्थानीय व्यापार में भी वृद्धि हुई है


भूमि अधिग्रहण और स्थानीय समुदायों का विस्थापन

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी परियोजना के लिए बड़ी मात्रा में भूमि का अधिग्रहण किया गया थाइसके कारण स्थानीय लोगों, विशेषकर आदिवासी समुदायों को अपने स्थान से विस्थापित होना पड़ाइस भूमि अधिग्रहण ने कई परिवारों के जीवन को प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप कई स्थानीय लोग इसे लेकर असंतोष व्यक्त करने लगे


आदिवासी संघर्ष और विरोध

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी और सरदार वल्लभभाई पटेल का हम आदर करते हैपर स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के नाम पर जो दूसरी परी योजना ओमे स्थानीय आदिवासी की जमीने छिनी जा रही है उनका आदिवासी समुदायों ने विरोध कियाउनका कहना था कि इस परियोजना से उनकी जमीन और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगाइसके साथ ही, आदिवासियों का यह भी कहना था कि इस परियोजना में उनकी संस्कृति और परंपराओं को नजरअंदाज किया गयास्थानीय आदिवासी समुदायों ने अपने अस्तित्व और अधिकारों की सुरक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन किए


निष्कर्ष

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी भारतीय एकता और सरदार पटेल के योगदान का प्रतीक हैहालांकि इस परियोजना ने भारत को पर्यटन और सांस्कृतिक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई पर पहुँचाया है, लेकिन इसके निर्माण से जुड़े कई विवादों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

डॉ. भाविनकुमार शांतिलाल वसावा

भरूच

 

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