यहां के आदिवासी लोगों का कहना है कि हम सरदार पटेल जी की प्रतिमा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरदार पटेल जी के नाम पर जो अन्य परियोजनाओं की आड़ में आदिवासी लोगों का शोषण हो रहा है, उसका हम विरोध कर रहे हैं। यहाँ के लोगों का कहना है कि सरदार पटेल ने हमेशा किसानों, गरीबों, और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा की। इसलिए उनके नाम पर आदिवासियों की जमीन, जंगल, और पानी छीनना और उनका विस्थापन करना उनके आदर्शों के खिलाफ है। आदिवासी समुदाय का यह भी मानना है कि उनकी जल, जंगल, जमीन पर उनका परंपरागत और कानूनी अधिकार है, जिसे सरकार द्वारा अनदेखा किया जा रहा है।
यहां के लोग विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनका कहना है कि विकास का मतलब उनके जीवन और आजीविका को नष्ट करना नहीं होना चाहिए। वे चाहते हैं कि विकास की योजनाओं में उनकी भागीदारी हो और उनके हितों का भी ध्यान रखा जाए।
यहाके लोगोका कहना है की ...
1. सरदार सरोवर नर्मदा निगम ने 2018-19 स्टैचू ऑफ यूनिटी के आसपास की 234 एकड़ जमीन प्राइवेट कंपनियों को सालाना ₹1 टोकन के हिसाब 30 साल के लिए जमीन दे दी गई जबकि वह जमीन है सरदार सरोवर बांध एवं कैनाल बनाने के लिए संपादित की गई थी। जबकि भूमि अधिग्रहण पुनर्वासन और पुनर्स्थापना में उचित प्रतिकार और पारदर्शिका का अधिनियम 2013 की धारा 101 कहती है कि जब इस अधिनियम के अधीन अर्जित कोई भूमि कब्जा लेने की तारीख से 5 साल की अवधि तक और प्रयुक्त रहती है तो उसे मूल स्वामी या स्वामियों को उनके विधिक उत्तराधिकारीयो को जैसा भी मामला हो वापस कर दिया जाएगा या समुचित सरकार के भूमि बैंक को समुचित सरकार द्वारा विहित तरीके से प्रत्यावर्तन द्वारा वापस कर दिया जाएगा।
2. अगुस्त ३० २०२० का ये केवड़िया का दृश्य रमन भाई और दिनेश भाई रतन बहेन सोमा भाई तडवी के घरों में सरदार सरोवर बांध का पानी छोड़ने की वजह से घरों में पानी घुस गया शनिवार आधीरात को उनके घरों में पानी घुस गया प्रशासन ने ना तो कोई जानकारी दी और ना ही कोई सहायता की आज दो दिन हो गए । पानी हमेशा आता रहा है पर गरुदेस्वर के पास वियर डैम बना है तब ये नोबात आ खड़ी हुई है । केवादिया, वागडिया, गोरा पिपरिया, वसंतपुरा, के कईं घरों में और खेतो में पानी घुस गया. यह के किसानों को खून के आंसू रोने के दिन आ गए है ।
3. जब पूरे विश्व में कोरोना की महामारी की वजह से पूरी दुनिया में लॉकडाउन था तब स्टैच्यू ऑफ यूनिटी गुजरात के नर्मदा जिले के गरुड़ेश्वर तहसील के केवड़िया, वागड़िया, नवागाम, लिमडी, बार फरिया, गोरा गांव के आदिवासियों पर उनकी जल_जंगल_जमीन हथियाने के लिए सरकार पुलिस प्रशासन के जोर पर उनकी जमीनों पर जबरन कब्जा किया गया, उनको घरों से बाहर कर दिया गया और वहां के आदिवासी जो बरसों से स्वनिर्भर थे तो उनको खेती करने से भी रोक दिया गया और उनकी स्वरनिर्भरता एवं अपने (schedule -5 & PESA ACT) हक अधिकार को छीन लिया गया..
4. तारीख 6 मई 2020 को वागड़िया गांव के दिनेश भाई मानिक भाई तडवी के खेत में सरदार सरोवर नर्मदा निगम के कर्मचारियों द्वारा पुलिस बल प्रयोग करके खड़े धान वाले खेत में फेंसिंग कर दी गई दिनेश भाई बताते हैं उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को अपने खेत के कागजात भी दिखाए उनको विनती भी .
की ऐसी लॉक डाउन की महामारी में सिर्फ खेती है जिनसे उनकी रोजी-रोटी चलती है उनका घर चलता है फिर भी स्थानिक प्रशासन एक की दो ना सुनी और उनके खेत खेतों में फेंसिंग कर दी गई.
5. वागड़िया के कई ऐसे आदिवासी किसान है जिनकी जमीन छीन ली गई लिमडी के पूर्व सरपंच दक्षा बहन बताती है कि जब वह विरोध कर रहे थे तो उनको पुलिस प्रशासन द्वारा बगैर कोई महिला पुलिस सहायता लिए पुरुष पुलिस द्वारा महिलाओं को पकड़ लिया गया.
6. तारीख 18 मई 2020 को केवड़िया गांव के आदिवासी किसानों की जमीनों पर और उनके घरों पर सरदार सरोवर निगम के कर्मचारियों द्वारा पुलिस बल का प्रयोग करते हुए उनको घरों से बाहर निकाल दिया गया विक्रम भाई चंदू भाई बताते हैं कि जब उनकी बेटी ने विरोध किया तो उनको घर से घसीटकर बाहर निकाल दिया गया और उनको पकड़ कर जेल में डाल दिया गया जब गांव की बहनों ने विरोध किया तो उनके ऊपर पुलिस के डंडे बरसाए गए बड़ी ही बेरहमी से उनको मारा गया, कंकू बहन बताती है कि उनकी साड़ी तक फाड़ दी गई थी
7. गोरा गांव के सरपंच शांतिलाल भाई तडवी बताते हैं कि वह सारे आदिवासी किसानों के कागजात प्रशासन को दिखाएं उन्होंने प्रशासन को बोला कि यहां के गांव का मुखिया मैं हूं आप किस अनुमति से यह सब कर रहे हैं तो उनको भी जेल में डाल दिया गया उनको भी मारा गया पीटा गया पुलिस के द्वारा जब सारे 14 गांव के लोगों ने इकट्ठा मिलकर यहां के कलेक्टर को आवेदन पत्र दिया तो उन्होंने बताया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी विकास सत्ता .. मंडल विधायक 37 " उनकी जमीनों पर कब्जा किया गया जबकि यह क्षेत्र अनुसूची 5 के तहत आता है तो यहां पर बगैर ग्रामसभा की अनुमति कैसे कोई राज्य सरकार यहां पर ऐसे कानून पारित कर सकती है ? गुजरात सरकार का यह तानाशाही रवैया देखकर हमें पता चलता है की ऐसी लॉकडाउन जैसी महामारी में भी आदिवासियों के ऊपर कैसे अत्याचार हुए "स्टैच्यू ऑफ यूनिटी विकास सत्ता मंडल विधायक 37 " यह कम था और एक और नया कानून गुजरात सरकार लेकर आई वह था " इको सेंसेटिव जोन "सुरपानेश्वर अभयारण्य जो गुजरात के नर्मदा जिले में करीबन ६०७ वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है यह अभयारण्य आदिवासियों का घर है उन्होंने पुरखों से यह जल जंगल जमीन बचाए हुए रखी है वह प्रकृति के पूजा की है कोरोना जैसी महामारी में इको सेंसेटिव जोन के नाम पर आज इन आदिवासियों के ऊपर विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है 121 गांव के आदिवासी किसानों के ७-१२ उनका नाम हटाकर गवर्नमेंट ऑफ़ गुजरात कर दिया गया उन किसानों को यह मालूम भी नही था की उनकी जमीन के कागजात पर गुजरात सरकार लिखा हुआ आया जब उन्होंन अपने कागजात ऑनलाइन निकलवाए तब ? और रजिस्टर में गवर्नमेंट ऑफ़ गुजरात के नाम से दर्ज की गई.
8. जिन जिन्होंने विरोध किया उनके ऊपर कई सारे पुलिस केस करके उनको जेल में डाल दिया गया उनको कई बार पुलिस प्रशासन के द्वारा प्रताड़ित किया गया आज परिस्थिति ऐसी है कि उनको खाने के लिए भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है उनके पास ना तो अपने खुद के खेत रहे हैं बस रहा है तो उनका घर वह भी पुलिस प्रशासन ने नोटिस दे दी गई है कि वह जल्द से जल्द घर खाली करें.
9. जिन आदिवासियों ने अपने जल जंगल जमीन संभाल कर रखा था उनको आज उजाड़ा जा रहा है जहां पर घने वृक्षों से भरा हुआ जंगल हुआ करता था आज वहां पर कंक्रीटो के जंगल बनने शुरू हो चुके है।
10. 30/08/20 सुबे सरदार सरोवर नर्मदा निगम बाद से पानी छोड़ा गया था। गरुड़ेश्वर के वियर डैम की वजह से काफी भारी मात्रा मै नुकसान हुआ था वह भी लॉक डाउन के समय मै उसकी वजह से खेतों में पानी भर गया और गर भी टूटे थोड़े। उन्हें मजबूरन अपने घर खाली करने पड़े। उसकी वजह से उनकी फसल भी बिगड़ गई ।
10. 2020 में आईएएस नीलेश दुबे द्वारा आदिवासी युवाओं जो स्टैचू ऑफ यूनिटी में नौकरी कर रहे हैं उनके ऊपर जाति सूचक गालियां दी गई उनको तीन माह का वेतन नहीं दिया गया। इस नीलेश दुबे द्वारा कई आदिवासी युवाओं को नौकरी से निकाल दिया गया। जब युवाओं ने एट्रोसिटी की फरियाद स्थानीय पुलिस को की तो उन्होंने भी एफआरआई दर्ज नहीं की
11. 6 अगस्त 2024 garudeshwar to statue of unity मैं 248 करोड़ की लागत से बंद रहे आदिवासी म्यूजियम में केवड़िया गांव के युवा जयेश भाई तडवी और गवना गांव के युवा संजय भाई तड़वी को बेरहमी से म्यूजियम बनाने वाले ठेकेदार द्वारा बेहरेनी से मारा पीटा गया और जयेश भाई की उसी जगह मृत्यु हो गई और दूसरे दिन राजपीपला हॉस्पिटल में संजय भाई का भी मृत्यु हो गई। और स्थानीय स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा इस मामले में ठेकेदार को बचाने के लिए कैसे को दबाने की कोशिश की गई सबूतों को मिटाने की कोशिश की गई और उनके माता-पीताओं को डराने धमकाने और कैसे न दर्ज करने की धमकियां दे दी गई
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